गुप्त साम्राज्य के पतन के कारणों का उल्लेख करे?

Gupt Samrajya Ke Patan Ke Karan – नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका eBuzzPro.com ब्लॉग में. और आज हम इस आर्टिकल में जानेंगे गुप्त साम्राज्य के पतन के कारणों का उल्लेख के बारे में. चुकी कुछ लोग को अब तक इस गुप्त साम्राज्य के बारे में तो पता ही नही है. की आख़िरकार गुप्त साम्राज्य क्या है? तो अगर आप भी जानना चाहते है तो बने रहिये इस मजेदार आर्टिकल में.

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गुप्त साम्राज्य के पतन के कारणों का उल्लेख?

Gupt Samrajya Ke Patan Ke Karan: गुप्त साम्राज्य के पतन के कारणों का उल्लेख
Gupt Samrajya Ke Patan Ke Karan

लगभग 200 वर्षो तक गुप्तो ने शासन किया. और भानु गुप्त के समय हूण नेता तोर माण ने गुप्त साम्राज्य पर आक्रमण करके उसकी कमर ही तोड़ दी. 5वि शताब्दी के अंत तक गुप्तो का गौरव नष्ट हो चूका था. और उसके 42 वर्षो बाद के सम्राट नाम मात्र हेतु शासन करते रहे. गुप्त साम्राज्य के पतन के निम्नानाकित प्रमुख कारण थे.

कारण 1. गुप्त साम्राज्य के पतन का सबसे महत्वपूर्ण कारण है अयोग्य उत्तराधिकारीयो का होना. स्कन्द गुप्त के पश्चात उसके उत्तराधिकारी अयोग्य तथा दुर्बल चरित्र के व्यक्ति हुए.

कारण 2. गुप्त साम्राज्य तंत्रीय शाशन प्रणाली द्वारा शासित था. साम्राज्य पर पिता की मृत्यु के पश्चात् पुत्र का पैत्रिक आदिकर माना जाता था. क्योकि जब राज्य पर पैत्रिक अधिकार निश्चित हो जाता है. तो राजकुमार बचपन से ही विसलितापूर्ण जीवन व्यतीत करने लगते है. और उन्हें अन्य रज्यो पर अधिकार करने के लिए योग्यता की परीक्षा देने का बे नही रह जाता.

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कारण 3. गुप्त साम्राज्य के पतन का उत्तरदायित्व बहुत कुछ हूणों के आक्रमण के पर भी आता है. उन्होंने अयोग्य गुप्त सम्राटो के शासन काल में गुप्त साम्राज्य की नीव हिला दी. और इस प्रकार हूणों के आक्रमण के फलस्वरूप गुप्त साम्राज्य पतानोंमुख हो गया.

कारण 4. सक्न्द गुप्त के उत्तराधिकारियों को हूणों के आक्रमण से देश की रक्षा करने में काफी धन व्यय करना पड़ता था. जिसके परिणाम स्वरुप गुप्तो का राजकोष रिक्त हो गया था.

कारण 5. अयोग्य अथवा निर्बल उत्तराधिकारियो के समय में प्रांतीय कर्मचारी बड़े ही महत्वाकान्छी हो गये थे. तथा स्वतंत्र होने के प्रयत्न करने लगे थे. निर्बल केंद्रय शक्ति प्रान्तों के विद्रोहों को दबाने में असफल सिद्ध हुई. सर्वप्रथम वल्लीभी के मैत्रियो में अपने को स्वतंत्र शासक गोषित किया. तदन्तर स्वराष्ट्र, मालवा तथा बंगाल के शासक स्वतंत्र हो गये. गुप्त साम्राज्य के पश्चिमी भाग-पंजाब पर हूणों ने आदिकर क्र लिया था.

कारण 6. परवर्ती शासक सीमांत प्रदेसो की रक्षा में असफल रहे. जिससे विदेसियो को भारत पर आक्रमण करने का प्रोत्साहन प्राप्त हुआ.

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कारण 7. गुप्त वंश के अंतिम सम्राटो में ब्राह्मण धर्म का परित्याग कर बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया था. अत: अहिंसावादी धर्म अपनाने के कारण गुप्तो की सेना कमजोर हो गयी. सैनिक शक्ति के आभाव में वे अपने शक्तिशाली शत्रुओ का सामना करने में असफल रहे. और इस प्रकार गुप्त साम्राज्य का पतन हो गया.

निष्कर्ष – तो आपको यह Gupt Samrajya Ke Patan Ke Karan: गुप्त साम्राज्य के पतन के कारणों का उल्लेख का पोस्ट कैसा लगा है. निचे हमे कमेंट करके जरुर बताये. साथ ही इस पोस्ट को शेयर करना न भूले.

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